यानी कि जब हम अपने लाइफ में कुछ एक्शन लेते हैं या कंटिन्यूड एक्शन लेते हैं तो हमें अपने लाइफ में उसके रिजल्ट जरूर देखने को मिलते हैं लेकिन हमारे माइंड में सबसे बड़ा क्वेश्चन यह आता है,
कि हम अपने कर्म करते क्यों नहीं है हम एक्शन लेते क्यों नहीं है? कर्म पैदा कहा से होता है, तो कर्म पैदा होता है हमारी मूलभूत इच्छाओं से, अब क्वेश्चन यह आता है कि यह इच्छाएं पैदा कैसे होती है?
तो हमारी इच्छाएं पैदा होती है हमारे विचारों से यानी कि हमारे थॉट से और थॉट को हम लोग 2 टाइप में डिवाइड कर सकते हैं, एक पॉजिटिव थॉट और एक नेगेटिव थॉट, 90% टाइम हमारे माइंड में नेगेटिव थॉट ही इंटर करते हैं जिसकी वजह से हमें अपने लाइफ में नेगेटिव परिणाम ही मिलते हैं,
लेकिन जब हम कोई मोटिवेशनल वीडियो देख लेते हैं कोई मोटिवेशनल ऑडियो सुन लेते हैं या फिर कोई अच्छी किताब पढ़ लेते हैं तो हमारे माइंड में पॉजिटिव थॉट इंटर कर जाते हैं जिसकी वजह से हमारे माइंड में पॉजिटिविटी का लेवल थोड़ा सा बढ़ जाता है,
और हम लोग मोटिवेट हो जाते हैं, और हम अपना कर्म यानी कि काम करने लगते हैं लेकिन जैसे ही यह मोटिवेशन का लेवल कम होता है हम अपना काम करना बंद कर देते हैं तो हमारी लाइफ का सबसे बड़ा क्वेश्चन यही है कि,
हम अपना काम निरंतर कैसे करें हम अपना कर्म निरंतर कैसे करें तो अगर हम अपना काम या कर्म निरंतर करना चाहते हैं तो हमें हमेशा पॉजिटिव रहना पड़ेगा 2 दिन 5 दिन पॉजिटिव रहके हम अपने काम को निरंतर नहीं कर सकते है,
अगर हम अपने कर्म को या काम को निरंतर करना चाहते हैं तो हमें हर दिन पॉजिटिव रहना बहुत जरूरी है।
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